Daaru Ki Dukaan Par Vastu Dosh Kyun Nahi Lagta? Asli Reason Yahan Hai!

Sun Jan 11, 2026

बहुत लोगों का कहना है —
“दारू की दुकान कहीं भी खोलो — गटर के पास, श्मशान के बगल में, गलत direction में — फिर भी खूब चलती है!” और फिर लोग निष्कर्ष निकाल  लेते हैं| 

👉 कि दारू के business पर Vastu लागू नहीं होता। लेकिन सच्चाई ये है कि दारू का business और वास्तुशास्त्र (Vastu Shastra) — दोनों का गहरा रिश्ता है, बस ये रिश्ता ऊर्जा (Energy) के स्तर पर होता है।

1. Demand vs Vastu दारू कोई जरूरत (necessity) नहीं, बल्कि habit और addiction पर आधारित चीज़ है।
इसलिए:

  • ग्राहक खुद दुकान तक आता है
  • उसे जगह की साफ-सफाई या शुभ-अशुभ दिशा की परवाह नहीं होती
  • दुकान चलती है, लेकिन वो positive या sattvik energy से नहीं चलती
➡️ Vastu मांग को नहीं, बल्कि energy flow को control करता है।

2. Tamasic Energy और दारू का व्यापार Vastu Shastra के अनुसार, दारू का व्यवसाय:
  • Tamasic energy से जुड़ा हुआ है
  • लोभ, मोह और अंधकार बढ़ाने वाला होता है
  • नकारात्मक और भारी ऊर्जा पर चलता है
ऐसे business को:
  • साफ-सफाई
  • प्राकृतिक प्रकाश
  • शुभ दिशा
    की उतनी आवश्यकता नहीं पड़ती
➡️ इसलिए वहां Vastu Dosh महसूस नहीं होता,
क्योंकि वो जगह पहले से ही tamasic vibrations से भरी होती है।

🔹 3. “दुकान चलना” और “मालिक का कल्याण” – दोनों अलग बातें हैं हाँ, दारू की दुकान चलती है 💰
भीड़ भी रहती है 🍾 लेकिन इसके साथ आता है —

💔 पारिवारिक कलह
⚡ मानसिक अस्थिरता
🧿 स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ
⚖️ कोर्ट केस, झगड़े
😞 आध्यात्मिक गिरावट वास्तु केवल यह नहीं देखता कि पैसा आ रहा है या नहीं,
बल्कि यह देखता है — “क्या वह पैसा peace, happiness और stability ला रहा है या नहीं।”

🔹 4. गटर या श्मशान के पास भी क्यों चलती है दुकान? क्योंकि:
  • वहाँ आने वाले लोग पहले से tamasic state में होते हैं
  • उन्हें वही नकारात्मक energy आकर्षित करती है
  • ऐसी जगहों पर energy conflict नहीं होता, बल्कि match होता है
पर जहाँ मंदिर, स्कूल या घर होते हैं —
वहाँ यही energy असंतुलन पैदा करती है।
➡️ इसलिए वहां Vastu Dosh महसूस होता है।

🔹 5. वास्तुशास्त्र (Vastu Shastra) क्या कहता है? 🕉️ Vastu कोई धर्म नहीं, बल्कि एक science of energy balance है। यह कहता है:
  • Sattvik business → शुभ दिशा और positive energy जरूरी
  • Rajsik business → साधारण वास्तु पर्याप्त
  • Tamasic business → कठोर नियम लागू नहीं होते
दारू का business tamasic है,
इसलिए वह “Vastu Dosh-free” तो दिखता है,
पर “Vastu-anukool” नहीं होता।

🔹 6. निष्कर्ष (In Short) ✔️ दारू की दुकान चलती है — ये सच है
❌ लेकिन उसे Vastu नहीं लगता — ये आधा सच है
✔️ Tamasic energy के कारण दोष दिखता नहीं
❌ लेकिन धीरे-धीरे मन, परिवार और कर्म पर असर होता है 👉 Vastu पैसा दे सकता है, लेकिन शांति सिर्फ सात्त्विकता से मिलती है।

 एक लाइन में “दारू की दुकान पर ग्राहक खुद चलकर जाता है 🥃
पर दूधवाला आपके घर आता है 🥛” यही कलियुग की सच्चाई है —
जहाँ तमसिकता है, वहाँ आकर्षण तो है… पर शांति नहीं! 🙏

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Rohit Shivdas kamble
Numerologist and Vastu Consultant